श्री चित्रगुप्त पूजा महोत्सव 2025 में भक्ति, भजन और संस्कृति का संगम — कुमार विशु की प्रस्तुति ने बांधा समां

श्री चित्रगुप्त पूजा महोत्सव 2025 में भक्ति, भजन और संस्कृति का संगम — कुमार विशु की प्रस्तुति ने बांधा समांनई दिल्ली (लोकनायकपुरम), 23 अक्टूबर 2025:लोकनायकपुरम स्थित श्री चित्रगुप्त समाज द्वारा आयोजित चौथा श्री चित्रगुप्त पूजा महोत्सव 2025 गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुआ। पूरे दिन चले इस भव्य आयोजन में समाज के सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और भगवान चित्रगुप्त से शिक्षा, नैतिकता व समाज की उन्नति की कामना की।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10:30 बजे विधिवत पूजा-अर्चना से हुआ।

श्रद्धालुओं ने कलम-दावात की परंपरागत पूजा कर भगवान चित्रगुप्त का आशीर्वाद प्राप्त किया। पूरे परिसर में भक्ति संगीत की मधुर ध्वनियाँ गूंजती रहीं और भक्तों ने परिवार सहित पूजन में भाग लिया। वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक और सकारात्मक ऊर्जा से भर उठा।शाम 5:30 बजे संध्या आरती के पश्चात जैसे ही 6:30 बजे सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ हुआ, पूरा लोकनायकपुरम परिसर भक्तिरस में डूब गया।कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे विश्वविख्यात भजन गायक श्री कुमार विशु, जिन्होंने अपनी मधुर आवाज़ में एक से बढ़कर एक भजन प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। पूरा पंडाल “जय चित्रगुप्त भगवान की” के जयकारों से गूंज उठा और भक्तिमय माहौल ने समूचे आयोजन को विशेष बना दिया।सांस्कृतिक कार्यक्रम में समाज के बच्चों और युवाओं ने अपनी प्रस्तुतियों से सभी का मन जीत लिया। नृत्य, कविताओं और भजनों के माध्यम से समाज की परंपराओं और संस्कारों का सुंदर चित्र प्रस्तुत किया गया।मंच संचालन में संयोजकों ने बेहतरीन तालमेल दिखाया, जिससे पूरा आयोजन अनुशासित और आकर्षक बना रहा।आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे श्री कुमार विशु, विश्वविख्यात भजन गायक, तथा श्री एस. एन. शरण, मुख्य अभियंता (Chief Engineer), DSIIDC।विशिष्ट अतिथियों में शामिल रहे —कुमार श्रीवास्तव (प्रबंध निदेशक, पूजा सिक्योरिटी कंपनी), सुशील खरे, महेंद्र सक्सेना, आर. पी. श्रीवास्तव, नीतिश वर्मा और मनीष श्रीवास्तव।सभी अतिथियों का आयोजन समिति द्वारा पुष्पमालाओं और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानपूर्वक स्वागत किया गया।पूरे आयोजन का संचालन समाजसेवी श्री रजनीश रंजन सिन्हा के सानिध्य में हुआ। उन्होंने अपने संबोधन में कहा —“चित्रगुप्त पूजा केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि यह शिक्षा, एकता और नैतिकता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन समाज के युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।” उनके प्रेरक संदेश ने उपस्थित जनसमूह में सामाजिक एकता और सेवा भावना की नई ऊर्जा भर दी।कार्यक्रम का समापन रात्रि 9:30 बजे सामूहिक भंडारे के साथ हुआ। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं। पूरे दिन लोकनायकपुरम क्षेत्र भक्ति, संगीत और सांस्कृतिक उत्साह से सराबोर रहा।इस सफल आयोजन में समिति के सदस्यों और कार्यकर्ताओं का विशेष योगदान रहा। प्रमुख कार्यकर्ताओं में शंभु प्रसाद कर्ण, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, रंजीत कर्ण, राजीव जी, रणधीर जी, एस. के. कर्ण, आलोक और दीपक जी शामिल रहे, जिन्होंने मंच, भोजन, सजावट और व्यवस्था की जिम्मेदारी बखूबी निभाई।लोकनायकपुरम में हर वर्ष आयोजित होने वाला श्री चित्रगुप्त पूजा महोत्सव अब राजधानी दिल्ली में सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुका है। समाज के युवाओं की बढ़ती भागीदारी यह दर्शाती है कि परंपराओं की जड़ें आज भी गहरी हैं।भक्ति, भजन और संस्कृति का यह संगम न केवल धार्मिक उत्सव है बल्कि समाज में नैतिक मूल्यों और एकता की भावना को सशक्त करने वाला एक प्रेरक आयोजन भी है।

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