
कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस मुख्यालय देहरादून कूच कर किया प्रदर्शन, नौजवान किसान सुखवंत सिंह हत्या मामला_
देहरादून /उत्तराखंड_ सवाल हर जेहन में, जवाब हर दिल तक पहुंचना चाहिए खामोशी से कर गुजरने का जज्बा अब खत्म हो चुका अब शोर मचा कर भी नहीं किया जा रहा न्याय _ जवाब किसी के पास नहीं_
जहां आत्माएं मर जाती हैं जमीर बेच दिया जाता है केवल चंद पैसों की खातिर ,जहां तंत्र भ्रष्ट हो चुका हो , जहां रक्षक ही रक्षक हो जाए, वहां न्याय की दहलीज पर न्याय कैसे मिलेगा! चंद सफेद पोश कपड़ों में नेता, खाकी वर्दी में पुलिस, फटे कपड़ों में जनता, बहुत बड़ा फासला है! इस फासले को कानून की दहलीज तक लाने में अपनी जिंदगी दाव पर लगा चुका होता है फरियादी! अब किसी फरिश्ता को ही आना पडेगा,,,,,,,,,,

गुलाम हम नहीं हमारी मानसिकता हो चुकी है जब आत्मा मर जाती है तब शरीर और दिमाग न्याय संगत फैसला नहीं दे सकता क्योंकि हम अंग्रेजों के जमाने में भी गुलाम रहे और आज भी इन नेताओं के गुलाम है हमारी मानसिकता ही गुलामी की रही है, जलियांवाला बाग में अंग्रेज डायर द्वारा गोली चलाने के आदेश को मानने वाले अंग्रेज नहीं थे बल्कि वह सब हिंदुओं की ही फोर्स थी

जो अंग्रेजों की गुलामी में हुकुम तामिल कर रही थी किसी हिंदू सिपाही ने अंग्रेज टायर पर गोली नहीं चलाई बल्कि उल्टा हिंदुओं को ही मारा! एक बड़ा नरसंहार हिंदुओं ने ही हिंदुओं के खिलाफ किया, हमने वर्षों से गुलामी झेली है हमें गुलामी मे रखना ही सत्ताधारियों का मिशन रहा है, हम अपने हक की लड़ाई भी नहीं लड़ सकते?

आज पुलिस मुख्यालय देहरादून पहुच कर नौजवान किसान सुखवंत सिंह आत्महत्या मामले में सुभाष रोड पर कार्यकर्ताओं ने भारी दलबल के साथ किसान सुखवंत सिंह मामले में निर्णायक फैसला न आने से नाराज प्रतिपक्ष नेताओं ने प्रदर्शन किया! लेकिन भारी पुलिस दल ने उन्हें वेरिकेटिग लगाकर रोक दिया गया, जिससे कांग्रेस नेता सड़क पर धरने पर ही बैठ गए नेता प्रतिपक्ष आर्य ने कहा कि उत्तराखंड की कानून व्यवस्था पूरी तरह फेल हो चुकी चाहे वह अंकिता कांड हो या किसान सुखवंत सिंह हत्याकांड! सरकार और पुलिस प्रशासन संदेह के घेरे में है जब आरोपी पुलिस वाले हैं तो पुलिस निष्पक्ष जांच कैसे कर सकती है काशीपुर पैगा के नौजवान किसान सुखवंत सिंह ने पुलिस के दबाव में आकर आत्महत्या जैसे जघन्य अपराध को अंजाम दिया है मौत से पहले पुलिस तंत्र पर जो आरोप लगाए गये हैं उसके शब्दों ने सबके दिलों को झंझोर कर रख दिया उसके इस कदम से उसके अंदर कितनी पीड़ा और दर्द रहा होगा उसने इस न्याय व्यवस्था से परेशान होकर मौत को गले लगाना पड़ा?

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि मृतक ने मरने से पहले अपने सुसाइड नोट में पुलिस के बड़े पुलिस अफसरो के नाम लिए हैंजिन अपराधियों के साथ पुलिस की साठ गांठ थी उसी डर से उसे अपनी जीवन लीला समाप्त करनी पड़ी, उस बयान के मध्य नजर एफआईआर दर्ज करके पुलिस कर्मियों को सजा का प्रावधान होना चाहिए था ? लेकिन नहीं हुआ प्रतिपक्ष नेता आर्य ने ऐसे अधिकारियों के खिलाफ उन्हें निलंबित किए जाने तथा उन पर एफआईआर दर्ज करने की भी मांग उठाई!
इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस नेताओं ने पुलिस विभाग में सरकार की भूमिका पर आरोप लगाते हुए उन्हें सवालों के घेरे में बताया दूसरी तरफ वर्तमान सत्ता में बैठे सत्ता पक्ष अपने चहेतों को बचाने का प्रयास कर रही है नेता कांग्रेस तिलक राज बेहड ने कहा कि हम पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के साथ उन भ्रष्ट पुलिस के कारनामों की सच्चाई सामने लाने के लिए आखिरी दम तक लड़ाई लड़ेंगे और इन भ्रष्ट्र सरकार एवं भ्रष्ट पुलिस तंत्र का भंडाफोड़ करेंगे?
रामनगर से नरेश चोपड़ा की रिपोर्ट
