मछली बाजार से डिजिटल मार्केट तक: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर कोली बेटियों की नई श्रद्धा की जुबानी गर्व की कहानी

मुंबई:आज पूरी दुनिया में International Women’s Day मनाया जा रहा है। इस मौके पर महाराष्ट्र के पारंपरिक कोली समाज की बेटियों में भी बदलाव की एक नई कहानी लिखी जा रही है। सदियों से समुद्र और मछली व्यापार से जुड़े इस समाज की महिलाएँ अब शिक्षा, तकनीक और डिजिटल दुनिया की ओर कदम बढ़ा रही हैं।इसी बदलाव की आवाज बनकर उभरी हैं

कोली समाज की युवा समाजसेवी श्रद्धा। एक स्नातक और पूर्व शिक्षिका रही श्रद्धा ने अपनी निजी आजीविका से आगे बढ़कर समाज की बेटियों के लिए काम करने का रास्ता चुना। उनका मानना है कि कोली युवतियाँ केवल मछली बाजार तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षा और तकनीक के जरिए दुनिया के नए अवसरों तक पहुँचें।

इस तरह कोली महिलाएँ हमेशा से आर्थिक रूप से मजबूत रही हैं, लेकिन सामाजिक पहचान और नेतृत्व के अवसर सीमित रहे।आज की नई पीढ़ी इस सोच को बदल रही है। श्रद्धा जैसी युवतियाँ कोली लड़कियों को शिक्षा, आत्मविश्वास और तकनीकी ज्ञान से जोड़कर उन्हें मुख्यधारा में लाने का प्रयास कर रही हैं।

उनका कहना है कि अब समय आ गया है कि कोली समाज की बेटियाँ भी डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन व्यापार और आधुनिक शिक्षा के जरिए अपनी पहचान बनाएं।प्रेरणा के तौर पर श्रद्धा अक्सर महाराष्ट्र की प्रसिद्ध किसान महिला Rahibai Soma Popere का उदाहरण देती हैं।

सीमित शिक्षा के बावजूद बीज संरक्षण और पारंपरिक कृषि में उनके योगदान के लिए उन्हें भारत के राष्ट्रपति Ram Nath Kovind द्वारा पद्मश्री और नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह कहानी बताती है कि इच्छाशक्ति और मेहनत से कोई भी महिला बड़ी उपलब्धि हासिल कर सकती है।

आज जब दुनिया ग्लोबलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में आगे बढ़ रही है, तब कोली समाज की बेटियाँ भी परंपरा के साथ आधुनिकता को अपनाकर नई पहचान बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का संदेश भी यही है —महिलाएँ केवल परंपरा की रक्षक नहीं, बल्कि समाज के भविष्य की निर्माता भी हैं।

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