मालिकाना हक संघर्ष समिति पटरानी रामनगर : बनग्रामों खेतों और सरकारी भूमि पर पीढ़ी दर पीढ़ी बसे ग्रामीणों का छल का दर्द

*ब्रेकिंग न्यूज़*_*एन,के, चोपड़ा की रिपोर्ट*__*मालिकाना हक संघर्ष समिति पटरानी रामनगर*__ *बनग्रामों खेतों और* *सरकारी भूमि पर पीढ़ी दर पीढ़ी बसे ग्रामीणों का छल का दर्द* *सरकार के खिलाफ किया प्रदर्शन

मालिकाना हक संघर्ष समिति के बैनर तले सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ सैकड़ो ग्रामीणों का गुस्सा दिखाई दिया, रामनगर की सड़कों पर सरकार पर *राजस्व ग्राम* का दर्जा न दिए जाने बाबत उम्मडा सैलाब, मालिकाना संघर्ष समिति के अध्यक्ष एस लाल ने सरकार को संबोधित करते हुए कहा कि हमारी जिस भूमि पर पीढ़ी दर पीढ़ी हमारे बुजुर्गों ने जिस जंगल को बसाया, बंजर भूमि को जमीन की खेती लायक बनाया, खेतों को सीचा आज उनही जमीनों पर से सरकार हमारा हक छीना चाहती है हमारा हक खत्म करना चाहती है सरकार हमारे ही वोटो से बनती है वहीं सरकार हमें वोट बैंक की तरह इस्तेमाल कर रही है!

रामनगर की सड़कों पर असंतोष तथा उम्मीद की रोशनी का जन सैलाब मलकाना हक संघर्ष समिति के बैनर तले लाखों लोगों का जन समूह रैली के रूप में रामनगर बाजार से होता हुआ तहसील मुख्यालय तक पैदल मार्च के रूप में एसडीएम कोर्ट पहुंचा और वहां पहुंचकर अपनी बुलंद आवाज से सोइ सरकार को अवगत कराने की कोशिश की!सभा में समिति के अध्यक्ष एस लाल ने बड़े दुख के साथ सरकार को चेताया कि इन वन ग्रामों और खेतों में रहने वाले लोग आज भी अपनी जमीन के मालिकाना हक विकास के नशे से वंचित हैं उन्हें ना सड़के ना बिजली का इंतजाम किया गया है फिर भी ग्रामीण उम्मीद लगाए हुए की एक न एक दिन उन्हें अपने गांव का राजस्व ग्राम का दर्जा मिलेगा और वह पंचायत चुनाव में अपनी साझेदारी एवं भागीदारी निभाकर अपने ही गांव का प्रधान चुन सकेंगे लेकिन आज तक हमें आश्वासनों के सिवाय कुछ नहीं मिला जब तक हमारी ये उम्मीद हकीकत नहीं बनती तब तक यह संघर्ष मलकाना हक और राजस्व ग्राम घोषित न हो जाए तब तक मलकाना हक संघर्ष समिति की लड़ाई जारी रखेगी!सभा में समिति के अध्यक्ष एस लाल, मोहम्मद ताहिर, संजय बोरा, पीसी बोरा (पूर्व अध्यक्ष अनुसूचित जाति आयोग) रमेश चंद्र, पुष्कर लाल, चंदन राम, रवि कुमार, गौरा देवी ,विनोद कुमार, गुलाम नबी, अली हुसैन, वजीर, राम सिंह, रवि कुमार, शारदा देवी, तुलसी देवी, किशोर कुमार, ललित कडाकोटी, समेत बड़ी संख्या में ग्रामीणों की भागीदारी रही?*ब्यूरो हेड नरेश चोपड़ा रामनगर*

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