मिट्टी में मिल गए वह शहंशाह*,*जिन्हें खुद पर गुमान था*!*वह इंसान नहीं झुका* , *जिसके सीने पर, भारत मां का नाम था*यह कहानी एक ऐसे शख्स की है एक ऐसा सिपाही जिसने महज ₹400 महीने के गुप्त कांटेक्ट पर वह दुश्मन देश में गया और भारत देश के लिए ढाल बनाकर नाम बदला, मजहब बदला, पहचान बदली, लेकिन वतन नहीं बदला,

*ब्यूरो हेड नरेश चोपड़ा की कलम से**डॉक्युमेंट्री*_ **मिट्टी में मिल गए वह शहंशाह*,*जिन्हें खुद पर गुमान था*!*वह इंसान नहीं झुका* , *जिसके सीने पर, भारत मां का नाम था*यह कहानी एक ऐसे शख्स की है एक ऐसा सिपाही जिसने महज ₹400 महीने के गुप्त कांटेक्ट पर वह दुश्मन देश में गया और भारत देश के लिए ढाल बनाकर नाम बदला, मजहब बदला, पहचान बदली, लेकिन वतन नहीं बदला, जिसने मात्र ₹400 के बदले अपनी पूरी जवानी ही नहीं अपना पूरा जीवन भारत माता को समर्पित कर दिया, पाकिस्तान की काल कोठरी में 35 साल बीताने के बाद जब वह भारत लौटा तो, वह जवान नहीं बल्कि एक चलती फिरती लाश बन चुका था! *सन 1973*,_पेशावर रावलपिंडी रोड पर 22 नवंबर माइलस्टोन के पास वह शक्स उत्तरा, नाम था इब्राहिम, कपड़े, बोली, नवाज का तरीका, चलने फिरने, उठने बैठने का तरीका सब कुछ ऐसा की कोई शक की गुंजाइश नहीं! होटल में ठहरा हो या पहचान दिखानी हो हर कागज बिलकुल दुरुस्त!कहावत है कि किस्मत जब दुश्मन बन जाए तो अपनी परछाई से भी डर लगने लगता है अपनी परछाई भी मुखबिर बन जाती है उसी वक्त पाकिस्तान इंटेलिजेंस की नजर उस पर टिक गई बिना शक बिना किसी ठोस सबूत के सिर्फ शक के आधार पर उसे उठा लिया गया!*_पूछताछ शुरू हुई*_*पहला सवाल*_ फिर चीखे, फिर इंसानियत को शर्मसार करने वाला वह दौर जिसे यातना कहते हैं_उससे सवाल किया गया कि_मान ले तू भारतीय जासूस है? लेकिन वह अढिग और खामोश रहा?भारतीय सेना का पूर्व जवान काश्मीर सिंह अब इब्राहिम बना वह जवान कोई आम आदमी नहीं था एक ऐसा जावाज सिपाही,_जिसने नाम बदला, मजहब बदला, पहचान बदली लेकिन बतन नहीं बदला? वह दुश्मन देश में भारत की ढाल बनकर खड़ा रहा!गिरफ्तारी के बाद जैसे कि हर जासूसी करने वालों के साथ होता है उन्हें यातना देने का शुरू हुआ वह दौर, यह सुनकर रूह कॉप उठती है ? नाखून उखाड़े गए_हड्डियां तोड़ने की कोशिश की गई!बिजली के करंट से झटके दिए गए!लेकिन देश के साथ गद्दारी नहीं, देश का राज उसके होठों से बाहर नहीं आया!अंत में उस नौजवान को मौत की सजा दी गई, लेकिन फांसी नहीं दी गई क्योंकि दुश्मन मुल्क चाहता था कि वह जिंदा रहे! हर दिन तिल तिल मरे, उसे जेल में डाल दिया गया_17 साल एक अकेला सेल,हाथ पैरों में जंजीरइतनी जगह भी नहीं की सीधा लेट सके,उसे काल कोठरी में डाल दिया गया?*35 सालों तक*उसने सूरज नहीं देखा,ना खुला आसमान,ना किसी अपने का चेहरा!अब तो दुश्मन जेल के पहरेदार भी उसे पागल समझने लगे,दिमाग भी जवाब देने लगा,लेकिन एक चीज कभी नहीं टूटी_उसकी देशभक्ति,उसे याद था अगर एक शब्द भी फिसल गया तो देश को बहुत बड़ा नुकसान होगा!जब वह पकड़ा गया था,उसकी पत्नी तीन छोटे-छोटे बच्चे थे तीनों की उम्र 10 से भीकम,दुनिया ने मान लिया काश्मीर सिंह मर चुका है!लेकिन पत्नी परमजीत नहीं मानी,उसने सफेद साड़ी नहीं पहनी,न सिंदूर छोड़ा ना चूड़ियां तोड़ी,उसका विश्वास अडिक था मेरा पति जिंदा है_एक दिन जरूर लौटेगा_1986 में पाकिस्तान ने कुछ भारतीय बंदियो की रिहाई सूची जारी की तब पता चला_काश्मीर सिंह जिंदा है, इसके बाद भी 22 साल और बीत गए!*फिर आया 2008*_ पाकिस्तान के मानवाधिकार मंत्री अंसार वर्णी लाहौर जेल का निरीक्षण करने पहुंचे_उन्होंने वहां देखा,_एक बेहद कमजोर टूटा हुआ बुजुर्ग_जांच में सामने आया कि यह आदमी 35 साल से बिना किसी मुकदमे के कैद है!*मानवीय आधार पर*_वर्णी ने राष्ट्रपति परवेज मुशर्राफ से उसकी रिहाई की सिफारिश की_*मंजूरी मिल गई*_4 मार्च 2008 को वाघा बॉर्डर पर कापते कदमों से एक बूढ़ा आदमी भारत की सीमा में दाखिल हुआ!सामने खड़ी थी उसकी पत्नी परमजीत कौर उसके बच्चे_यह पल सिर्फ मिलन नहीं था वह यात्रा भारत इतिहास की थी, लेकिन भारतीय जमीन पर पैर रखते ही उसकी रीड की हड्डी सीधी हो गई_वह गर्व से बोल मैं भारतीय जासूस था!मैंने अपना फर्ज निभाया,दुश्मन देश ने मुझे 35 साल कैद में रखा, लेकिन मेरे मुंह से एक शब्द भी नहीं निकलवा पाये!*एक ऐसा योद्धा*_ जिसने अपनी जवानी, अपना जीवन, सब कुछ भारत पर न्योछावर कर दिया?कश्मीर सिंह ने साबित कर दिया देश भक्ति की कोई कीमत नहीं होती वह खून में होती है?

*ब्यूरो हेड नरेश चोपड़ा लीड इंडिया टीवी*

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