शहीद का गुमनाम सफर करतार सिंह सराभा

करतार सिंह सराभा का जन्म 24 मई 1886 को लुधियाना जिले के सराभा गांव में हुआ था !करतार सिंह सराभा भारत को अंग्रेजों की दासता से आजाद करने के लिए अमेरिका में बनी गदर पार्टी के प्रेसिडेंट थे !भारत में एक बड़ी क्रांति की योजना के चलते उन्हें फांसी पर चढ़ाया गया! मौत को गले लगाने वाला यह वह गुमनाम क्रांतिकारी शहीद जिससे आज हम भूल चुके हैं, जिसके नाम से ही अंग्रेज कापते थे फांसी से पहले जल्लाद भी काप गया था आज इतिहास ने उसके बलिदान को भुला दिया, इतिहास की नींव में लगे उस हीरे की तस्वीर धूमिल भले ही हो गई हो, लेकिन चमक आज भी जिंदा है?
आज उस शेर की बात हो रही है
जिस 19 साल के नौजवान *करतार सिंह सराभा *की कलेजा चीर देने वाली एक ऐसी दास्तान_

कहते हैं की फांसी से पहले जब 19 साल का वह शेर ने अपनी मां से आखिरी मुलाकात कर रहा था तो उस शेर की आंखों में अजब देश भक्ति का जज्बा देख मां भी हैरान थी मां से मुलाकात में करतार सिंह सराभा ने कहा_ कि मां मैं इस दुनिया से दूर जा रहा हूं बहुत जल्दी लौट कर आऊंगा लेकिन आने वाले इतिहास में मेरे जैसे सूर्य वीरों को हमेशा याद किया जाएगा और तेरी जैसी जन्म देने वाली मां को?
करतार सिंह सराभा वह शेर थे जिसे देखकर खुद अंग्रेज जल्लाद भी कॉप उठा था, फांसी देने से पहले जल्लाद के भी हाथ पैर कॉप रहे थे?
शहीद भगत सिंह सराभा जी को अपना गुरु मानते थे और उनकी फोटो हमेशा अपनी जेब में रखते थे वह कोई फिल्मी सितारा नहीं थे बल्कि जिंदगी में यही हमारे आदर्श और देश के हीरो थे उनके इस साहस और देश प्रेम का वह रूप देखकर पत्थर भी रो पड़ते थे? जब शहीद करतार सिंह सराभा को सजा सुनाई गई तो उनके दादा उनसे मिलने जेल आए दादा ने रोते हुए कहा_ “बेटा तूने यह क्या किया घर के चिराग बुझ जाएंगे”
19 साल के सराभा ने हंसते हुए कहा_ दादाजी अगर मैं हैजा या प्लेग से मरता तो आप क्या कहते, देश के लिए मर रहा हूं इससे बड़ी हमारे लिए दिवाली और क्या हो सकती है?
मौत को गले लगाने का वह दिन 16 नवंबर 1915 का जब फांसी का फंदा उनके सामने था तो वह सामने अडिक खड़े मुस्कुरा रहे थे फांसी की सजा सुनकर उनका वजन कम होने की वजह 5 किलो बढ़ गया था, अंग्रेज अफसर हैरान थे मौत के डर से रूह कॉप जाती है वजन कम होकर डर से बदन सूख जाते हैं_ यह लड़का किस मां का दूध पिया है जो खिल खिलाकर हंस रहा है?
सराभा ने फंदा चूमते हुए कहा था “जल्दी करो मुझे दोबारा जन्म लेना है ताकि फिर से भारत मां के लिए लड़ सकूं” जहां आज हम जात-पात धर्म के नाम पर आपस में लड़ रहे हैं उलझे हुए हैं और यह लड़का 19 वर्ष की उम्र में अमेरिका की ऐशो_ आराम की जिंदगी छोड़कर फांसी पर झूल गया ताकि हम आजादी की सांस ले सके !आज इन क्रांतिकारियों की कुर्बानियां की कीमत हम नहीं चुका पा रहे हैं जब हमारे ही लोग अपने ही देश में इस भारत मां को खंड-खंड करने में लगे हुए हैं, इन देशभक्तों का दिल क्या कहता होगा हमारी कुर्बानियों का यह सिलसिला जिसे आज भुला दिया गया?
हम सब इन महान क्रांतिकारियों के चरणों में एक लाइक और नमन तो कर ही सकते हैं देखते हैं आज कितने लोग शहीद क्रांति कारी के लिए कितने लोग लाइक और सब्सक्राइब करते हैं जय हिंद जय भारत माता?
नरेश चोपड़ा लीड इंडिया टीवी

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