
हैदराबाद में साइबर फ्रॉड का बड़ा मामला: वरिष्ठ नागरिक से ₹10.86 लाख की ठगी, भाजपा नेता डॉ. आशीष कुमार पर आरोप
हैदराबाद, 30 सितम्बर 2025।
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक वरिष्ठ नागरिक ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से सक्रिय रूप से जुड़े डॉक्टर आशीष कुमार के खिलाफ साइबर अपराध की गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायतकर्ता रमेश कुमार (61 वर्ष) ने आरोप लगाया है कि डॉ. आशीष कुमार सहित कुछ व्यक्तियों ने अपने आपको नेशनल बोर्ड ऑफ एग्ज़ामिनेशन्स (NBE) का अधिकारी बताकर उनसे ₹10,86,660/- की ठगी की।
कौन हैं डॉ. आशीष कुमार? या इसका नाम मोहम्मद इमरान जावेद ?
डॉ. आशीष कुमार उर्फ मोहम्मद इमरान जावेद उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के निवासी हैं और भाजपा की सक्रिय राजनीति में जुड़े हुए हैं। सोशल मीडिया पर वे अक्सर अपनी तस्वीरें साझा करते हैं, जिनमें महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ दिखाई देते हैं। इन तस्वीरों के जरिए वे खुद को प्रभावशाली और ताक़तवर साबित करने का प्रयास करते हैं।
कैसे हुआ फ्रॉड
शिकायत के अनुसार, अप्रैल से मई 2025 के बीच पीड़ित को बार-बार फोन और व्हाट्सएप कॉल आए। कॉल करने वालों ने खुद को NBE का अधिकारी बताया और भरोसा दिलाया कि उनके चार FMGE उम्मीदवारों को पात्रता (Eligibility) मिल जाएगी। ट्रूकॉलर पर आरोपी का नंबर “NBE OFFICE” के नाम से सेव दिखाई देने के कारण शिकायतकर्ता धोखे में आ गए।
ठगी का तरीका
NBE अधिकारी बनकर कॉल और मैसेज किए गए।
डर और दबाव डालकर पैसे वसूले गए।
झूठा आश्वासन दिया गया कि मेडिकल उम्मीदवारों को पास करा दिया जाएगा।
वरिष्ठ नागरिक को लगातार गुमराह किया गया।
सिटिज़न्स कॉन्शियस फोरम की भूमिका
शिकायत मिलने के बाद सिटिज़न्स कॉन्शियस फोरम के अध्यक्ष के. कुमार ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने महाराष्ट्र पब्लिक कमिश्नर, उत्तर प्रदेश कमिश्नर, प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय और साइबर अपराध शाखा तक इस शिकायत को पहुँचाया। साथ ही मानवाधिकार से संबंधित पहलू को भी रेखांकित करते हुए कार्रवाई की मांग की। उनकी सिफारिश पर यह मामला अब कानूनी कार्यवाही की दिशा में बढ़ रहा है और डॉ. आशीष कुमार के खिलाफ जल्द ही कार्रवाई संभव है।
पैसों का लेन-देन
रमेश कुमार ने बताया कि अलग-अलग ट्रांज़ैक्शन के जरिए ₹10.86 लाख की रकम उनसे वसूली गई। उन्होंने सभी भुगतान रसीदें, बैंक विवरण, कॉल लॉग और व्हाट्सएप चैट्स जांच एजेंसियों को सौंप दी हैं।
पीड़ित की पीड़ा
वरिष्ठ नागरिक रमेश कुमार ने कहा कि इस ठगी से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक आघात पहुँचा है। वे तीन महीने से लगातार पैसा वापस पाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन हर बार बहाने बनाए गए और कई बार आरोपियों ने मोबाइल भी बंद कर लिए।
