ट्रांसजेंडर विन्नी डार्लिंग की मार्मिक अपील समाज छक्का हिजड़ा एक गाली है बात करते समय न करे

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मुझे अपने आप पर बहुत गर्व होता है ईश्वर ने इस धरती पर जन्म देकर हमें बहुत बड़ा उपकार किया है हम लोगों की खुशियों में खुशियां लाने का ही काम करते हैं जब भी किसी बच्चे का जन्म होता है हम उसके लिए दुआएं मांगते हैं ईश्वर से लेकिन लोग हमें रिस्पेक्ट देने के बजाय हमें लोग छक्का कहते हैं ऐसा लगता है किसी ने मुझे गाली दे दिया हो मुझे और हमारे जैसे अनेकों किन्नर को आखिर क्यों ? जब गवर्नमेंट आफ इंडिया ने हमें रिस्पेक्ट दी है सरकार ने भी हमें सम्मानित जीवन जीने का सर्वोच्च न्यायालय ने अधिकार दिया तो समाज हमें छक्के जैसे शब्दों का इस्तेमाल क्यों करता है? हां हम ट्रांसजेंडर हैं यह तो प्रकृति का नियम है ईश्वर जन्म सभी को देता है लेकिन कभी-कभी ईश्वर की गलतियों से हमारा जन्म किन्नर समाज में हो जाता है तो क्या हमें जीवन जीने का हक नहीं है मैं आप सभी से एक निवेदन करती हूं कि आप जब भी हमें देखें हमर नाम हमसे पूछे और हमारे नाम से हमसे बात करें हमें अच्छा लगेगा हमारे मां-बाप ने या हमारे समाज ने हमें एक नाम दिया है जब कोई हमें उसे नाम से पुकारता है तो हमें अपने आप पर ग्लानि नहीं गौवनवीत होने का मौका मिलता है मैं आप सभी से निवेदन करूंगी कि जब कहीं भी हम मिले तो आप हमारे हमसे नाम से हमें छक्का करके हमें अपमानित करने का प्रयास न करें हमारे भी दिल है हमारे दिलों को भी दुख पहुंचता है हम आपकी खुशियों में और भी खुशियां भर देंगे एक बार हमें इज्जत से अपना कर तो देखें हमारा नाम पूछ कर देखिएगा हमारे चेहरे पर लाखो मुस्कान आ जायेगी और आपको भी हम अपनी दुवावों से आपके झोली में खुशियां ही खुशियां भर दूंगी जज्बातों में हर बार कोई न कोई सवाल आते और मेरे दिल में क्या था जो मैं अपने आपको पहचान नहीं पा रहा हूं या मैं अपनी पहचान खोता जा रहा हूं मैं अपनी पहचान के इस भंवर में इस तरीके से गोते खा रहा खा रहा था जिस तरीके से समुंदर में लहराती हूं लहरों पर नाव हिचकोले खाती है क्या कहूं आपसे क्या आज दिल की बात कह दो मैं सोचती हूं कि अपने दिल की बात कह दूं या कहूं आप यह सोच रहे हैं कि मैं आपसे ऐसी बातें क्यों कर रही हैं जी मैं एक ट्रांसजेंडर हूं जी हां मैंने सही कहा मैं एक ट्रांसजेंडर हूं जब मेरा जन्म हुआ था तो मेरे घर पर भी खुशियां हुई थी लोगों ने तालियां बजाई थी हमारे दरवाजे पर भी हमारे घर पर भी खुशियों का मेला लगा था क्योंकि मैं जन्म से लड़का ही था लेकिन पता नहीं क्यों जैसे जैसे मेरी उम्र बढ़ती गई मेरे अंदर से एक स्त्रीत्व की भावना जन्म ले रही थी मैं सोचती थी कि मैं पुरुष होते हुए भी मेरे अंदर स्त्रीत्व का जन्म क्यों हो रहा है मुझे लड़कों के साथ खेलना अच्छा नहीं लगता था मुझे लड़कियों के साथ खेलना बहुत अच्छा लगता था कभी-कभी चोरी से अपनी बहन के कपड़े पहन लेती थी सजती थी संवरती श्रृंगार करती तो मुझे सब कुछ अच्छा लगता था मैंने कई बार चोरी से लिपस्टिक लगाई काजल भी लगाया चुटिया भी बनाई और मां ने मुझे बहुत मारा कोई मुझे समझने की कोशिश नहीं कर रहा था मुझे यह समझ नहीं आ रहा था ईश्वर ने मुझे किस रूप में जना है मैं जैसे-जैसे बड़ी हो रही थी समाज के तानों से और व्यंग से परेशान हो रही थी मेरे माता-पिता को मुझे लेकर अनेकों सवाल हो रहे थे वो सवालों से घिरे जा रहे थे और मैं पाबंदियों से मुझे लग रहा था कि मेरी जिंदगी में जो पाबंदियां हैं वह मुझे मौत के किनारे लेकर जा रही थी एक पल ऐसा भी आया कि मैं अपने आप को रोक नहीं पाई और मैं कुएं में कूद गई जिंदगी समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर ईश्वर ने मेरी जिंदगी में कभी-कभी ऐसा लगता है जब मैं महाभारत को देखती तो मुझे एहसास होता कि हमारी संस्कृति को भी सम्मान दिया गया था जो आज किसी भी ट्रांसजेंडर को नहीं मिलता है मैं अपने आप को साबित करना चाहती थी सम्मान से जीना चाहती थी लेकिन मैं जिंदगी से हार रही थी और मौत के करीब अचानक मेरे दिमाग में ख्याल आया पंजाब का छोटा सा जिस घर में रहती थी यहां का माहौल यहां की संस्कृति और यहां के मुझे यहां रहने के लिए मजबूर कर रही थी मुझे कोई राह नहीं दिखाई दिया एक दिन मैं मुंबई की तरफ अपनी जिंदगी अपनी जिंदगी के मोड़ दिया आपको क्या लगता है इस शहर ने मुझे स्वीकार किया नहीं चीन से भी मिलती थी जब उन्हें पता चलता था कि मेरे अंदर की भावना है मेरे साथ बर्ताव करना चाहते थे जिसकी कल्पना भी नहीं कर सकती समाज इतना गंदा क्यों है समाज में इतनी कुसंस्कृति क्यों है आप भी मेरी जिंदगी पर हंस रहे होंगे लेकिन मैं क्या करूं मैं ईश्वर का वरदान कहूं अपने आपको या ईश्वर का भी धन्यवाद कहूं लेकिन मैं तो यह कहूं ईश्वर ने मुझे जिस रूप में जन्मा है मैं उस ईश्वर को धन्यवाद देती हूं आज जब मैं अर्धनारीश्वर शिव को देखती हूं तो अंदर से एक भावना जागृत होती है कि भगवान शिव ने भी अर्धनारीश्वर का रूप तो दिखाया था सब ने उनको सम्मान दिया अगर हमारा जन्म इस तरीके से हुआ है क्या इस समाज में हमें जीने का हक नहीं है क्या यह समाज हमें जीने की इजाजत नहीं देता सुप्रीम कोर्ट का तहे दिल से धन्यवाद स्वागत करती हूं कि हमें वह सम्मान दिया हमें अधिकार दिया कि आज जिंदगी जीने की कोशिश कर रहे हैं समझ में आएगा कि हमारे लिए भी यह संसार है संसार में जीने का हक भी है आखिर क्यों नहीं समझता कि हमारे अंदर भी एक स्त्रीत्व की भावना है और खुशियां खुशियां बांटना चाहती मैं किस समाज की बात कर रही हूं जो मुझे खा लेना चाहता है की तरह मुझे नोच नोच के मेरे बदन को खा लेना चाहता है या मेरे मस्तिष्क को या मेरी आत्मा को आखिर ऐसा क्यों होता है मैं अकेले तनहाइयों में बैठकर बहुत रोती हूं जब मुझे याद आती है मां की पिता की और बहनों और अपने बचपन के दोस्तों की बहुत याद सताती है जी करता हम मिलकर जी भर के रो लो उनके गले लग जाऊं या कहूं कि मुझे अपना ले तेरी बेटी हूं मैं मैं सोच सोच कर डर जाती हूं कि क्या मुझे अपना आएगी मेरी आत्मा को अपना लेना आज मैं पूर्ण रुप से ट्रांसजेंडर हूं

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