काला सच: बॉलीवुड वर्टिकल OTT सीरीज़ का काला चेहरा – मजदूर, कलाकार और टेक्नीशियन शोषण की हदों पर, OTT कंपनियाँ भी बन रहीं चुप गवाह लीड इंडिया टीवी न्यूज़

काला सच: बॉलीवुड वर्टिकल OTT सीरीज़ का काला चेहरा – मजदूर, कलाकार और टेक्नीशियन शोषण की हदों पर, OTT कंपनियाँ भी बन रहीं चुप गवाह

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बॉलीवुड की चमक-दमक और वर्टिकल OTT सीरीज़ के बढ़ते बाज़ार के पीछे एक ऐसा स्याह सच है जो हजारों मजदूरों, कलाकारों और टेक्नीशियनों का खून-पसीना छुपाए बैठा है।
गुप्त सूत्र बताते हैं कि अधिकतर प्रोजेक्ट्स में वर्कर्स से सुबह 8 बजे से रात 11 बजे तक लगातार काम कराया जाता है, लेकिन मजदूरी सिर्फ एक शिफ्ट की ही दी जाती है।

विरार, नाला सोपारा, नाइगांव और मीरा रोड जैसे दूरदराज़ इलाकों से रोज़ाना सफर करने वाले ये लोग सुबह 4 बजे उठते हैं और रात 2 बजे घर लौटते हैं,
जिससे उनकी नींद, मानसिक स्वास्थ्य और शारीरिक क्षमता पर गंभीर असर पड़ रहा है।

डर का माहौल, और बॉलीवुड यूनियनों की चुप्पी—सबसे बड़ा सवाल

मजदूरों और टेक्नीशियनों के अनुसार:
“अगर शिकायत की तो काम बंद कर दिया जाएगा, फिर बॉलीवुड में दोबारा मौका नहीं मिलेगा।”
इसी डर की वजह से कोई आवाज़ नहीं उठाता।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि बॉलीवुड की बड़ी यूनियनें—
FWICE, Allied Mazdoor Union, Junior Artists Association, Lightmen Association, Spot Boys Association, Make-up & Costume Association
—इस मुद्दे पर लगातार चुप हैं।

ना निरीक्षण, ना ओवरटाइम की जांच, ना वर्कर्स की सुनवाई।
प्रश्न है—आखिर क्यों?

खास खुलासा: वर्टिकल OTT वेबसीरीज़ के निर्माताओं की मनमानी — और OTT कंपनियों की चुप्पी!

गुप्त सूत्रों से बड़ी जानकारी यह सामने आई है कि कई वर्टिकल OTT वेबसीरीज़ के निर्माता (Producers / Line Producers)
वर्कर्स के साथ मनमानी करते हुए:

14–18 घंटे काम कराते हैं

ओवरटाइम नहीं देते

सुरक्षा मानक लागू नहीं करते

भुगतान में देरी करते हैं

शिकायत करने पर काम बंद करने की धमकी देते हैं
लेकिन इससे भी बड़ी और चौंकाने वाली बात यह है कि
कई OTT प्लेटफॉर्म और उनके क्रिएटिव हेड भी शूटिंग लोकेशन पर मौजूद रहते हैं।
मतलब—
उन्हें यह पूरा शोषण पता है, लेकिन वे चुप रहते हैं।

यह चुप्पी सवाल खड़ा करती है कि:
“क्या OTT कंपनियों की भी निर्माताओं के साथ मिलीभगत है?”

अगर कार्य-समय, सुरक्षा नियम और वर्कर राइट्स का उल्लंघन उनकी जानकारी में हो रहा है और वे कार्रवाई नहीं करते,
तो यह कानूनी रूप से गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है।

एग्रीमेंट में कार्य-समय का उल्लेख अनिवार्य किया जाए

लीड इंडिया टीवी न्यूज़ मांग करता है कि:

सभी OTT कंपनियाँ अपने वेबसीरीज़ एग्रीमेंट में साफ-साफ लिखें—

मजदूरों,

टेक्नीशियनों,

जूनियर आर्टिस्टों,

और क्रू मेंबर्स

के काम के घंटे (8 घंटे + निर्धारित ओवरटाइम)
का स्पष्ट उल्लेख हो।

पालन न करने वाले निर्माताओं पर सख्त कार्रवाई हो

OTT कंपनी भी जवाबदेह हो, क्योंकि प्रोजेक्ट उनकी निगरानी में बनता है

ओवरटाइम का भुगतान कानूनी रूप से अनिवार्य हो

स्वास्थ्य और जीवन के लिए बड़ा संकट

लगातार 18–20 घंटे की दिनचर्या, कम नींद, मानसिक दबाव और असुरक्षित कार्य-स्थितियाँ
हार्ट अटैक, हृदय रोग, हाई BP, डिप्रेशन और अचानक मृत्यु का जोखिम तेज़ी से बढ़ा रही हैं।

इसका सबसे ज्यादा खतरा 30–55 वर्ष के मजदूरों और टेक्नीशियनों पर है।

सरकार और श्रम मंत्रालय से सीधी अपील—अब सख्त कार्रवाई जरूरी

लीड इंडिया टीवी न्यूज़ महाराष्ट्र सरकार, माननीय मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री, श्रम मंत्रालय और केंद्र सरकार से निवेदन करता है:

वर्टिकल OTT शूटिंग लोकेशंस पर गुप्त निरीक्षण किया जाए

नियम तोड़ने वाले निर्माताओं पर कानूनी FIR और भारी जुर्माना लगाया जाए

OTT कंपनियों को भी जवाबदेह बनाया जाए

सभी यूनियनों से जवाब तलब किया जाए

वर्कर हेल्थ चेक-अप और मेडिक्लेम अनिवार्य किया जाए

अन्यथा…

अगर ये स्थितियाँ नहीं सुधरीं, तो किसी भी समय:

हार्ट अटैक,

मानसिक बीमारी,

थकावट से दुर्घटना,

और मृत्यु

जैसी घटनाएँ सामने आ सकती हैं।

यह केवल शोषण नहीं —
यह मानव अधिकारों की हत्या है।

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