
न्यूवन ग्रामों को राजस्व गांव का दर्जा देने की मांग तेज
रामनगर_ लंबे समय से वन ग्राम में बसे लोग अपनी ही जमीन का मालकाना हक को पाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, जिनके बाप, दादा इन जमीनों पर लंबे समय से खेती करके अपने तथा अपने परिवार का लालन पालन कर रहे थे आज वन विभाग द्वारा उन जमीनों को वापस लेने की बात कही जा रही है जबकि सच्चाई यह है कि इन जमीनों का मालकाना हक इन किसानों को मिलना चाहिए!

इसके लिए मालकाना हक संघर्ष समिति बनाकर भी इन लोगों ने काफी लंबे समय से आंदोलन की राह पर भूखे, प्यासे रहकर संघर्ष चला रहे हैं? शासन प्रशासन इन किसानों की सुद्ध ही नहीं ले रहा है हर बार सरकारे बदलती है चेहरे बदलते हैं नए कानून बना दिए जाते हैं! सरकार इन लोगों का आधार कार्ड, राशन कार्ड, वोटर कार्ड भी बनवा चुकी है और यह लोग स्थाई रूप से उन जमीनों पर रह रहे हैं जब भी चुनाव होने वाला होता है तब तब नेता प्रतिपक्ष हो या सत्ताधारी नेता आकर इन्हें बोट बैंक मानकर इस्तेमाल करने लगते हैं?
2027 का चुनाव नजदीक होने के कारण अब नेता प्रतिपक्ष इन्हें अपना मोहरा बनाने तथा अपना वोट बैंक पक्का करने में लग गए हैं लेकिन जमीन का माल काना हक की जिम्मेदारी जो की तो ही बनी हुई है?

अभी-अभी मेरे सहयोगी रिपोर्टर मोहम्मद कैफ खान की रिपोर्ट के आधार पर लीड इंडिया के ब्यूरो हेड (उत्तराखंड) नरेश चोपड़ा को अवगत कराया गया है कि वन ग्रामों को राजस्व गांव घोषित करने और ग्रामीणों को जमीन का *मलकाना हक देने की मांग को लेकर प्रतिपक्ष कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत उत्तराखंड के नेतृत्व में एक पैदल पद यात्रा *जल_ जंगल_ जमीन हमारी* के नारों के साथ निकाली गई इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण मलकाना हक संघर्ष समिति के बैनर तले जनप्रतिनिधि शामिल हुए! पद यात्रा शहर के विभिन्न मार्गो से होती हुई तहसील परिसर रामनगर पहुंची, जहां प्रदर्शनकारियों ने एसडीम रामनगर के माध्यम से सरकार को ज्ञापन देकर ग्रामीणों ने वन ग्रामों की जमीनों पर रह रहे किसानों की जमीनों का मलकाना हक दिए जाने के साथ-साथ वन ग्रामों को राजस्व गांव घोषित करने की बात कही?
इस मौके पर पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस हरीश रावत के साथ कांग्रेस के अनेक जनप्रतिनिधि तथा उच्च अधिकारी भी शामिल हुए !इस मौके पर हरीश रावत ने ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए सरकार पर भेदभाव का भी आरोप लगाया !हरीश रावत ने आगे कहा कि वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को उनके अधिकार से वंचित रखकर उनको केवल वोट बैंक के लिए इस्तेमाल यह सरकार कर रही है? उन्होंने कहा कि जब तक वन ग्रामों को राजस्व गांव का दर्जा नहीं मिलता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा? यह तो वक्त ही बतागा कि कहीं पूर्व की भांति इस बार भी वोट बैंक की राजनीति तो नहीं हो रही,,,,
रामनगर से ब्यूरो हेड नरेश चोपड़ा की रिपोर्ट
