अजब राज्य की गजब कहानी: पहाड़ की पीड़ा, सड़क के लिए तरसता गांव

अजब राज्य की गजब कहानी: पहाड़ की पीड़ा, सड़क के लिए तरसता गांव

रामनगर/भीमताल (उत्तराखंड)।

देश में डिजिटल इंडिया और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच उत्तराखंड के कई पर्वतीय गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। भीमताल क्षेत्र के लोश ज्ञानी गांव की स्थिति इन दावों की हकीकत बयां करती नजर आती है, जहां दशकों के इंतजार और सैकड़ों वादों के बावजूद आज तक कच्ची सड़क पक्की नहीं बन सकी है।

गांव के लोगों का कहना है कि बरसात के दिनों में बच्चों को स्कूल जाने के लिए कीचड़ और पानी से भरे रास्तों को पार करना पड़ता है। कई बार युवाओं को परीक्षा या अन्य जरूरी कार्यों के लिए उफनते बरसाती नालों को जोखिम उठाकर पार करना पड़ता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से सड़क निर्माण के नाम पर आश्वासन तो मिलते रहे, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। हालात ऐसे हैं कि कई स्थानों पर बीमार लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए आज भी डोली या कंधों का सहारा लेना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब सरकारी तंत्र से उम्मीद टूटने लगी तो गांव के लोगों ने स्वयं श्रमदान कर सड़क निर्माण का प्रयास शुरू किया। ग्रामीणों ने अपने संसाधनों और मेहनत के बल पर सड़क बनाने का बीड़ा उठाया, लेकिन प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर नियमों का हवाला देते हुए कार्य रुकवा दिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि जिस सड़क के लिए वे वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं, उसके निर्माण को लेकर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। उनका कहना है कि बजट की घोषणाएं तो होती हैं, लेकिन विकास कार्य जमीन पर दिखाई नहीं देते।

उत्तराखंड के पहाड़ों से लगातार हो रहे पलायन को भी ग्रामीण इसी समस्या से जोड़ते हैं। उनका कहना है कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में युवा बेहतर भविष्य की तलाश में शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। गांवों में केवल बुजुर्ग और महिलाएं रह गई हैं, जो आज भी मूलभूत सुविधाओं की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि लोश ज्ञानी गांव सहित प्रदेश के उन सभी दुर्गम गांवों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान दिया जाए, जहां आज भी सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी आवश्यक सुविधाएं पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि सरकार पहाड़ के दर्द को समझते हुए जल्द ही ठोस कदम उठाएगी और वर्षों से लंबित विकास कार्यों को पूरा करेगी।

रिपोर्ट: नरेश चोपड़ालीड इंडिया टीवी न्यूज़

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