स्व. कविराज आत्माराम दूबे जी की पंचम पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि, सेवा और संस्कार की मिसाल

गोरखपुर संवाददाता ओम दुबे की रिपोर्ट : कविराज आत्माराम दूबे जी की पंचम पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि, सेवा और संस्कार की मिसाल
गोरखपुर — सेवा, संस्कार और समर्पण की अद्भुत मिसाल रहे स्वर्गीय कविराज आत्माराम दूबे जी की पंचम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं शुभचिंतकों ने उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए और उनके योगदान को याद किया।
स्व. कविराज आत्माराम दूबे जी अपने समय के प्रतिष्ठित आयुर्वेदाचार्य थे। उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा के माध्यम से न केवल रोगियों का उपचार किया, बल्कि समाज में मानवीय मूल्यों, सेवा और करुणा की मिसाल कायम की। उनके पास आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को उपचार के साथ आत्मीयता, विश्वास और स्नेह भी प्राप्त होता था।
गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों की सेवा को उन्होंने अपना जीवन धर्म माना। उनका मानना था कि चिकित्सक का कार्य केवल रोग का उपचार नहीं, बल्कि रोगी को मानसिक संबल और विश्वास देना भी है। इसी कारण वे समाज में अत्यंत सम्मानित रहे और आज भी लोगों के दिलों में उनकी स्मृतियाँ जीवित हैं।
उनके सुपुत्र वैद्य कृष्ण निकेतन दूबे ने अपने पिता के आदर्शों को आत्मसात करते हुए जनसेवा और आयुर्वेद की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है। वहीं पौत्र अविजीत कृष्ण दूबे एवं आदित्य कृष्ण दूबे भी परिवार के संस्कार, मर्यादा और सामाजिक दायित्वों को आगे बढ़ाने में सक्रिय हैं।
परिवार और समाज के लोगों ने कहा कि स्व. आत्माराम दूबे जी का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। उनके द्वारा स्थापित सेवा, मानवता और समर्पण की परंपरा सदैव समाज को नई दिशा देती रहेगी।
“यद् यदाचरति श्रेष्ठः तत् तदेवेतरो जनः।”
अर्थात श्रेष्ठ व्यक्ति जैसा आचरण करता है, समाज उसी का अनुसरण करता है। स्व. कविराज आत्माराम दूबे जी का जीवन इस विचार का सजीव उदाहरण था।
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