
गायब होते बच्चों का काला सच, बचपन बचाओ आंदोलन चलाओ_
शॉकिंग रियलिटी इन चाइल्ड ट्रैफिकिंग इन इंडिया
डॉक्युमेंट्री__ बाल तस्करी का अर्थ है किसी बच्चे को धोखा लालच, प्रलोभन के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान, एक मुल्क से दूसरे मुल्क ले जाना ताकि ऐसे बच्चों से बाल मजदूरी, यौन शोषण करवाने, बाल विवाह या अवैध अंग व्यापार जैसे धंधों के लिए किया जा सके!
देश में हर साल हजारों की संख्या में देश के कोने कोने से बच्चे लापता हो रहे हैं किसी भी लापता परिवार के बच्चों के लापता होने से परिवार को असीम पीड़ा का दर्द सहना पड़ता है, यह बच्चे जिनके पास पहुंच जाते हैं वह इन्हें बंधक बनाकर इसे अनैतिक काम करने के साथ-साथ देह व्यापार जैसे धंधे में धकेल देते हैं !भीख मंगवाते हैं शरीर के अंग तक निकल कर भेज देते हैं यह घिनौना काम बरसों से होता चला आ रहा है?

कुछ समय पूर्व में ही एक 12 साल की बच्ची के रेस्क्यू का मामला बहुत ज्यादा चर्चा में आया था इस मासूम की खरीद फरोकत करके उसे देह व्यापार में धकेल दिया गया था इतना ही नहीं उसे अपनी उम्र से बड़ा दिखाने के लिए हारमोंस के इंजेक्शन भी दिए गए कुछ समय बाद उस मासूम बच्ची को 200 से ज्यादा ग्राहकों को परोसा गया, हालांकि अब उसका रेस्क्यू कर लिया गया है

वह अभी भी मेंटल अवस्था से उभर नहीं पाई !एक परिवार के माता-पिता ने ₹2,00000 के लालच में अपनी ही बच्ची को बेच दिया था, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआर बी) के मुताबिक हर साल लाखों बच्चे भारत से लापता हो रहे हैं अनुमान लगाया जाए भारत में हर 10 मिनट में एक बच्चा गायब होता है हर साल 96 हजार बच्चों का शोषण एवं अपहरण कर लिया जाता है यूनिसेफ एजेंसियों के मुताबिक भारत में 1.2 करोड़ बच्चे जबरन शोषण का शिकार हो रहे हैं बिहार, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मुंबई, झारखंड, पंजाब, हरियाणा से चाइल्ड ट्रैफिकिंग का शिकार होते जा रहे हैं!
कम पड़े लिखे, अशिक्षित परिवारों के बच्चे जिनके माता-पिता झूठे वादों पर विश्वास कर लेते हैं, ग्रामीण पिछड़े इलाकों के गरीब परिवारों के बच्चे, प्राकृतिक आपदाओं या आंतरिक गरीबी से प्रभावित बच्चे, जैसे बाढ़, सूखाग्रस्त इलाके, दंगे के बाद गरीबी से जूझ रहे परिवारों के बच्चे,

तस्कर और खरीददार हर जाति सामाजिक पैसे और जीवन शैली के मध्यम आयु वर्ग के बच्चों की तस्करी करते- है या करवाते हैं!
लड़कियों को विशेष रूप से यौन शोषण और वेश्यावृत्ति के लिए बेचा जाता है वहीं दूसरी ओर फैक्ट्री, घरों और खेती के धंधों में कम पैसे में काम पर लगाया जाता है अवैध अंग व्यापार में भी गरीब बच्चों के अंग निकाल कर बेचा जा रहा है, बाल विवाह के नाम पर भी गरीब परिवारों की बच्चियों को मजबूरन शादी के नाम पर बेचा जा रहा है बच्चों को अपंग बनाकर उनसे भीख मंगवाने के रैकेट भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं?

तस्करी का मामला धीरे-धीरे नासूर बनता जा रहा है हमारी सरकार ने कानून तो बहुत बनाए लेकिन सही तरीके से इसे लागू करने की आवश्यकता है इस तरह के मामलों में समय के साथ-साथ पैसों की भी हानि होती है इस कारण गरीब परिवार कानून से दूरी बनाए रखता है अगर अपराधी पकड़ा भी जाता है अपराधी जल्दी ही जमानत पर छूट जाते हैं अपराधी बच जाते हैं और कुछ समय बाद फिर दोबारा चाइल्ड ट्रैफिकिंग को अंजाम देना शुरू कर देते हैं अगर भारत में सख्त कानून बनाकर उस पर सही और तुरंत कार्रवाई हो तभी हमेशा के लिए चाइल्ड ट्रैफिकिग का यह काला कारोबार बंद हो सकेगा,,,,,,,,,
रामनगर से नरेश चोपड़ा की रिपोर्ट
