उत्तराखंड बचाओ अभियान*__*इनफेरी वालों से रहे सावधान*

*उत्तराखंड बचाओ अभियान*__*इनफेरी वालों से रहे सावधान*__मैं उत्तराखंड के सभी ग्राम वासियों, शहर वासियों से अपील करता हूं कि आप और हम आज से ही अपने उत्तराखंड को देवतुल्य भूमि पर जिहादियों के मनसूवो को नाकाम करने का संकल्प ले_ फेरी लगाने वालों के कारण उत्तराखंड सरकार को सीधा-सीधा (राजस्व विभाग) को चूना लगाया जा रहा है फेरी वाले सारा सामान उत्तराखंड के बाहर से लाकर बिना टैक्स चुकाये बेच रहे हैं एक्साइज डिपार्टमेंट( टैक्स विभाग )को पता ना चले इसलिए छोटे-छोटे गठरियों में सामान लाकर बेचते हैं?यदि लोकल दुकानदार इन फेरी वालों का विरोध भी करते हैं तो अपने ही लोग अपनों का विरोध करने लगते हैं फेरी वाले भी इसका फायदा उठाते हुए कहते हैं

कि हम अल्पसंख्यक हैं कमाने आए हैं कमा के अपने छोटे छोटे बच्चों का गुजारा करते हैं कहना शुरू कर देते हैं और पुलिस विभाग भी कानून का हवाला देकर स्थानीय दुकानदारों पर ही हावी हो जाते है स्थानीय दुकानदार भी एक दूसरे का साथ नहीं देते क्योंकि जिसको दिक्कत है वही बोले, हमें क्या, इस नीति पर हम काम कर रहे हैं!पर क्या छोटे दुकानदार की दुकान बंद होने का असर बड़े लोकल दुकानदारों पर नहीं पड़ता, बिल्कुल पड़ता है_फर्क पड़ेगा_ जब बाहर से आकर घर-घर जाकर सामान बेचेंगे तो ग्राहक दुकानों पर क्यों जाएंगे जब उन्हें वही सामान घर बैठे ही मिल जाएगा, दुकानदार दुकानों में इतना पैसा इन्वेस्ट कर खाली बैठा रहेगा!फेरी लगाने वालों को हर गांव की हर घर गली की पूरी जानकारी रहती है कि घर का मर्द कब घर से बाहर होता है!इन फेरी वालों को आपके घर की हर गतिविधि का पता होता है, इसी जानकारी का फायदा उठाते हुए यह फेरी वाले आपके घरों को टारगेट करते हैं घरों के तालों को तोड़कर रात में चोरियों का सिलसिला बढ़ रहा है, चाय पानी के नाम पर भी हम लोग उनका खूब आदर् सम्मान करते हैं हम भूल जाते हैं कि जिन लोगों को हम घरों में बैठाकर चाय नाश्ता करवा रहे हैं वही फेरीवाले हमारे घरों में किराए का मकान लेकर हमारी ही बहन बेटियों को *लव जिहाद* का हिस्सा बना रहे हैं?यदि समय रहते उत्तराखंड के दुकानदार, समाज, गांव के लोग, पुलिस विभाग सचेत नहीं हुये तो आने वाले समय की परिस्थितिया इतनी भयंकर होने वाली है जब हमें इन जिहादियो का सामना करने का वक्त भी ना मिले!इन फेरी वालों का बहिष्कार करिए_ सावधान रहे, सुरक्षित रहे?*

रामनगर से नरेश चोपड़ा की रिपोर्ट*

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