माघी पूर्णिमा पर खिचड़ी का महत्व_ माहा मास में पूर्णिमा, जिसे माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है हिंदू धर्म में स्नान, दान और तपस्या के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है!

रामनगर/ हल्द्वानी : माघी पूर्णिमा पर खिचड़ी का महत्व_ माहा मास में पूर्णिमा, जिसे माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है हिंदू धर्म में स्नान, दान और तपस्या के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है!
इस दिन विशेष रूप से खिचड़ी बनाने और खाने का गहरा धार्मिक ज्योतिषीय और सांस्कृतिक महत्व है!
माघ महीने में उड़द की काली दाल का महत्व है जो शनि देव को शांत करने के लिए मानी जाती है ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार खिचड़ी का सेवन शनि के दोषो को कम करने की मान्यता है जिससे जीवन में सुख समृद्धि आती है और शनि की साडेसाती दूर होती है विशेष रूप से पितृ दोष, कालसर्प दोष और ग्रहों से संबंधित विकारों से मुक्ति मिलती है मकर संक्रांति पर नई फसल आती है इसलिए उस अनाज से सबसे पहले खिचड़ी बनाकर सूर्य देव को भोग लगाने की भी परंपरा चली आ रही है?

मकर संक्रांति के दिन खिचड़ी दान करने से पितर प्रश्न होते हैं और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है,
मान्यता है कि गोरखपुर के बाबा गोरखनाथ ने मकर संक्रांति पर खिचड़ी की शुरुआत की थी तब से अब तक यह परंपरा चली आ रही है?
आज दिनांक 31 जनवरी शनिवार को हल्द्वानी मे सारथी फाउंडेशन समिति के तत्वाधान में माघ मास खिचड़ी वितरण का कार्यक्रम आयोजित कर शिव मंदिर मां जगदंबा बैंक्विट हॉल नहर कवरिंग मुखानी रोड पर “मांघमास” “खिचड़ी” बनाकर प्रसाद के रूप में लोगों में वितरण किया गया, जिसमें सैकड़ो लोगों ने इस प्रसाद को ग्रहण किया तथा पुण्य के भागीदार बने?

आज के इस कार्यक्रम को संचालित करने वाले भक्तगण_
नवीन पंत अध्यक्ष
ज्ञानेंद्र जोशी सचिव
कमल जोशी कोषाध्यक्ष
केतन जायसवाल, हेमा जोशी, पुष्पा पंत, भावना जोशी, गीता बेलवाल आदि ने इस पुण्य काम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया?
रामनगर से नरेश चोपड़ा की रिपोर्ट

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