आज मैं आपको बाघा बॉर्डर के बारे में वे सभी चीज बताऊंगा जो आपको वाघा बॉर्डर तक लेकर आएंगी, आपने बाघा वार्डर कैसे पहुंचना है

डॉक्युमेंट्री_ नरेश चोपड़ा की कलम से_ आओ चले बाघा बॉर्डर__ मेरे प्रिय सम्मानित देशवासियों_आज मैं आपको बाघा बॉर्डर के बारे में वे सभी चीज बताऊंगा जो आपको वाघा बॉर्डर तक लेकर आएंगी, आपने बाघा वार्डर कैसे पहुंचना है_ अगर आप कभी अमृतसर आए जहां धार्मिक स्थान हरमंदर साहब( स्वर्ण मंदिर) वह ऐतिहासिक स्थान सुशोभित है! जलियांवाला बाग है,

जहां बाघा बॉर्डर को झंडा उतारने के रस्म के तौर पर भी जाना जाता है !भारत सरकार द्वारा वाघा बॉर्डर को एक सैलानी केंद्र के रूप में प्रोत्साहित किया गया है वही एक ग्लोबल पर्यटन परिसर के निर्माण की भी योजना विचार अधीन है!
बाघा बॉर्डर को एशिया की बर्लिन दीवार के नाम से जाना जाता है भारत और पाकिस्तान को परस्पर जोड़ने वाला यह बॉर्डर जीटी रोड पर स्थित है जिसके एक और लाहौर तथा दूसरी ओर अमृतसर नामक प्रसिद्ध नगर है?

यह बॉर्डर अमृतसर से करीब 32- 33 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, अमृतसर से बाघा जाते समय खालसा कॉलेज, गुरु नानक देव विश्वविद्यालय, के अतिरिक्त अटारी नामक गांव आते हैं अटारी में मुख्य सड़क पर शहीद श्याम सिंह अटारी की आदमकद प्रतिमा सैलानियों के आकर्षण का केंद्र है नेशनल हाईवे अथवा शेरशाह सूरी मार्ग जिसे प्राय: जीटी रोड भी कहा जाता है वाघा बॉर्डर पहुंचने के लिए अमृतसर से करीब एक घंटा लगता है निजी वाहन या ऑटो रिक्शा या अपने साधनों से भी वाघा बॉर्डर पहुंचा जा सकता है?

आजादी से पहले अंग्रेजी साम्राज्य के समय बाघा गांव ब्रिटिश पंजाब की लाहौर डिविजनल में स्थित था! 1947 में विभाजन के बाद यह गांव भारत और पाकिस्तान में बट गया दोनों देशों के बीच एकमात्र यातायात मार्ग होने के कारण 1947 के बाद कुलियो के द्वारा इस बॉर्डर के रास्ते सामान लाने लेजाने का काम किया जाता था? भारत व पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस पर यहां पर 14 व 15 अगस्त को दोनों देशों के अमन और शांति बनाए रखने के लिए नागरिकों ने वाघा बॉर्डर पर मोमबत्तियां जलाकर पारस्परिक सुधार का इजहार किया था! यह भारत व पाकिस्तान के समझौते के रूप में जनता के बदले हुए मन की प्रतिक्रिया स्वरूप था?
सन 2005 मार्च को बॉर्डर विषय पर विचार विमर्श करने के लिए भारतीय बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बीएसएफ )का एक दल बाघा बॉर्डर के पाकिस्तानी रेंजर से मिला, परिणाम स्वरुप मई 2005 में पाकिस्तान द्वारा पांच विशेष खाद्य पदार्थों को बाघा वार्ड द्वारा कर मुक्त ले जाने की आज्ञा मिल गई! प्रथम अक्टूबर 2006 को पहली बार कुछ ट्रक वाघा बॉर्डर से सामान लेकर गए! भारत पाक संबंधों में उतार-चढ़ाव के बावजूद इस व्यापार में निरंतर वृद्धि हो रही है?
आज सैलानियों के लिए वाघा बॉर्डर एक विशेष आरक्षण का केंद्र है हर रोज शाम को झंडा उतारने रिट्रीट की रसम होती है, जिसे देखने के लिए भारतीय, पाकिस्तान के सैलानी अपने-अपने देश की गैलरी में इकट्ठे होते हैं इस जगह सड़क को लोहे के दो गेटो द्वारा बंद किया गया है जिसके चारों ओर कंटीले तारे हैं दोनों गेटों के ऊपर दोनों देशों के राष्ट्रीय ध्वज लहराते हैं अपने-अपने राष्ट्र की शान के लिए (बीएसएफ) के जवान व पाकिस्तानी रेंजर्स 24 घंटे पूरी मुस्तैदी से पहरा देते हैं? बॉर्डर की गैलरी तक पहुंचने के लिए करीब डेढ दो किलोमीटर लंबी पंक्ति में स्त्रियों वह पुरुषों को अलग-अलग जांच के लिए जाना पड़ता है यहां (बीएसएफ) के जवान पूरी तरह तलाशी लेते हैं कोई भी व्यक्ति अपने साथ किसी प्रकार के खाने पीने की सामग्री नही ले जा सकता है! झंडा उतारने की रसम से पहले स्पीकर ऊंची आवाज में देशभक्ति के गीतों का प्रसारण करते हैं?

उस समय सारा वातावरण भक्तिमय हो जाता है इस सारी कार्रवाई में (बीएसएफ) के जवानों की मुख्य भूमिका रहती है!( बीएसएफ) के जवानों द्वारा भारतीय दर्शकों को जिनमें विदेशी भी शामिल होते हैं तीन तरह के नारे लगाने की इजाजत होती है नंबर 1_ हिंदुस्तान जिंदाबाद 2_ भारत माता की जय 3_ वंदे मातरम? पाकिस्तान क्षेत्र में वहां के पाकिस्तानी रेंजर्स द्वारा पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए जाते हैं?
देश भक्ति के गीतों पर हाथ में तिरंगा लेकर दौड़ने वालों के हृदय में राष्ट्र पर मरने मिटने की भावना की झलक साफ दिखाई दे रही होती है, दर्शक गैलरी पर भारतीय सैलानियों की भीड़ देखते ही बनती है मुख्य द्वार के दोनों ओर बनी गैलरियों में 4000 लोगों के बैठने की क्षमता होती है किंतु वहां लगभग 8000 लोग एकत्र हो जाते हैं! रिटीट की रस्म प्राय 5:30 बजे आरंभ होकर करीब आधे घंटे बाद पूरी हो जाती है? इससे पूर्व (बीएसएफ) के जवान पूरे उत्साह के व जोश के साथ हिस्सा लेते हैं, उस समय दर्शक तालियां बजाकर अपने जवानों का हौसला अफजाई करते हैं?


झंडा उतारते समय लोहे के दोनों गेट खोल दीये जाते है, दोनों देशों के सैनिक एक दूसरे से हाथ मिलाते हैं और धीरे-धीरे दोनों देशों के जवान संगीत की मधुर ध्वनि में अपने-अपने देश के झंडा को उतार कर संभाल लेते हैं और गेटों को पुन: बंद कर दिया जाता है? कहते हैं कि जिसने बाघा बॉर्डर नहीं देखा उसने कुछ नहीं देखा बाघा बॉर्डर और जवानों के जोश को बढ़ाने के लिए जो धुन बजाई जाती है कहते हैं सोते हुए मुर्दे भी नाचने लगते हैं यही है मेरे देश के (बीएसएफ जवानों) की शान?
इसलिए आप बाघा बॉर्डर जरूर आए?
लुधियाना से नरेश चोपड़ा की रिपोर्ट

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