
नवी मुंबई: बेलापुर किले के अस्तित्व को बचाने की जंग; CCF और रिपब्लिकन पार्टी ने थामी पुनरुद्धार की कमान
नवी मुंबई:
समय की मार और अनदेखी के कारण खंडहर बन चुके ऐतिहासिक बेलापुर किले के दिन अब बहुरने वाले हैं। नवी मुंबई की पहचान माने जाने वाले इस प्राचीन दुर्ग को उसके गौरवशाली इतिहास के साथ फिर से जीवित करने के लिए सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने एकजुट होकर मोर्चा संभाल लिया है।

इतिहास के पन्नों में कैद बेलापुर किल्ला
पनवेल की खाड़ी के किनारे एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित यह किला 16वीं शताब्दी (1560-1570) का गवाह है। जंजीरा के सिद्दियों द्वारा निर्मित इस अभेद्य दुर्ग पर पुर्तगालियों, मराठाओं और अंततः अंग्रेजों का शासन रहा। 1817 में अंग्रेजों द्वारा आंशिक रूप से नष्ट किए जाने के बाद यह किला धीरे-धीरे विस्मृति के अंधेरे में खो गया था।
पुनरुद्धार के लिए उठे हाथ
किले की जर्जर स्थिति और ढहती दीवारों को बचाने के लिए सिटी एंड कोस्टल फाउंडेशन (CCF) के अध्यक्ष के. कुमार ने एक विशेष मुहिम शुरू की है। उनके इस संरक्षण अभियान को रिपब्लिकन पार्टी (नवी मुंबई) के अध्यक्ष का भी कड़ा समर्थन मिला है।

अभियान के मुख्य बिंदु:
ऐतिहासिक संरक्षण: किले के मूल स्वरूप को बरकरार रखते हुए इसकी मरम्मत करना।
पर्यटन को बढ़ावा: नवी मुंबई के युवाओं और पर्यटकों को इस ऐतिहासिक धरोहर से जोड़ना।
साफ-सफाई और सुरक्षा: झाड़-झंखाड़ से घिरे बुर्जों की सफाई और सुरक्षा घेरा तैयार करना।
”हर पत्थर एक इतिहास है”
CCF अध्यक्ष के. कुमार का मानना है कि बेलापुर किल्ला केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक जीवित पाठशाला है। वहीं, रिपब्लिकन पार्टी के स्थानीय नेतृत्व ने प्रशासन से मांग की है कि CIDCO के साथ मिलकर इस परियोजना को युद्ध स्तर पर पूरा किया जाए।
स्थानीय निवासियों और इतिहास प्रेमियों ने इस पहल का स्वागत किया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सही समय पर यह पुनरुद्धार कार्य सफल होता है, तो बेलापुर किल्ला महाराष्ट्र के पर्यटन मानचित्र पर एक चमकते सितारे की तरह उभरेगा।
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